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अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी से भारतीय पेशेवरों पर असर: H1B वीजा प्रक्रिया में कड़ी शर्तें, रोजगार के अवसर सीमित

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डोनाल्ड ट्रम्प की “अमेरिका फर्स्ट” पॉलिसी ने कई क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर प्रभाव डाला है, और भारत के साथ अमेरिका के संबंधों पर भी इसका असर देखा जा सकता है। यह नीति विशेष रूप से अमेरिकी श्रमिकों और कंपनियों के हितों को प्राथमिकता देती है, जिससे विदेशी कामगारों के लिए चुनौतीपूर्ण स्थितियां उत्पन्न होती हैं।

भारत के हजारों पेशेवरों के लिए H1B वीजा का महत्व है, जिसके जरिए वे अमेरिकी कंपनियों में नौकरी पा सकते हैं। ट्रम्प के कार्यकाल में H1B वीजा नीति में कई कड़े बदलाव किए गए, जिनका उद्देश्य अमेरिकी श्रमिकों के रोजगार को बढ़ावा देना था।

हालांकि बाइडन प्रशासन ने ट्रम्प की कई नीतियों को हल्का किया है, फिर भी “अमेरिका फर्स्ट” की भावना अभी भी अमेरिकी नीतियों में दिखती है, जो भारतीय पेशेवरों के लिए एक चुनौती बनी हुई है।

भारत और अमेरिका के बीच सुरक्षा और सामरिक साझेदारी भी ट्रम्प के कार्यकाल में मजबूत हुई। “अमेरिका फर्स्ट” नीति के बावजूद ट्रम्प प्रशासन ने भारत के साथ रक्षा समझौते किए और क्वाड (Quad) जैसी साझेदारियों को समर्थन दिया।

अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी का भारत के व्यापारिक और आर्थिक संबंधों पर भी प्रभाव पड़ा।

“अमेरिका फर्स्ट” नीति ने एक तरफ भारतीय पेशेवरों के लिए चुनौतियाँ पैदा कीं, तो दूसरी तरफ चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में भारत को अमेरिका का समर्थन मिला।

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