ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान देश की संसद में विवाद खड़ा हो गया। जब किंग चार्ल्स ने ऑस्ट्रेलिया की संसद का दौरा किया, तो एक महिला सांसद ने उनके खिलाफ तीखे आरोप लगाते हुए संसद में नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने किंग चार्ल्स को राजा मानने से इनकार करते हुए उन्हें “हमारे लोगों के हत्यारे” कहा।
महिला सांसद का आरोप: औपनिवेशिक शोषण और हिंसा
यह घटना तब हुई जब किंग चार्ल्स तृतीय अपने पहले आधिकारिक विदेशी दौरे पर ऑस्ट्रेलिया पहुंचे। संसद में किंग का स्वागत किया जा रहा था, उसी समय विपक्षी दल की एक महिला सांसद ने खड़े होकर उन पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “आप हमारे राजा नहीं हैं, आप हमारे लोगों के हत्यारे हैं।” उनके इस बयान ने ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में हलचल मचा दी है।
महिला सांसद का आरोप है कि ब्रिटिश साम्राज्य के दौरान ऑस्ट्रेलिया में हजारों आदिवासियों को मार दिया गया था और उनके संसाधनों को लूटा गया। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शाही परिवार, खासकर किंग चार्ल्स, इस इतिहास के प्रतीक हैं और अब समय आ गया है कि ऑस्ट्रेलिया अपनी पहचान को औपनिवेशिक प्रभाव से अलग करे।
किंग चार्ल्स की प्रतिक्रिया और शाही परिवार की स्थिति
किंग चार्ल्स ने इस अप्रत्याशित घटना पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन शाही परिवार के करीबी सूत्रों का कहना है कि वे इस तरह के विरोध से पहले से ही अवगत थे। ब्रिटेन और उसके पूर्व उपनिवेशों के बीच संबंधों पर बढ़ती बहस के बीच, शाही परिवार इन मुद्दों पर संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की कोशिश कर रहा है।
यह किंग चार्ल्स का ब्रिटेन का राजा बनने के बाद पहला आधिकारिक विदेशी दौरा था, और उन्हें उम्मीद थी कि ऑस्ट्रेलिया में उनका स्वागत भव्य होगा। हालांकि, इस घटना ने उनके दौरे पर काले बादल ला दिए हैं।
औपनिवेशिक विरासत पर विवाद
ऑस्ट्रेलिया में ब्रिटिश औपनिवेशिक इतिहास को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। आदिवासी समुदायों और उनके समर्थक लगातार इस बात की मांग कर रहे हैं कि ब्रिटेन अपनी औपनिवेशिक गलतियों को स्वीकार करे और मुआवजा दे। कई ऑस्ट्रेलियाई नागरिक अब यह सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या देश को ब्रिटिश शाही परिवार से अपने संबंधों को खत्म कर एक स्वतंत्र गणराज्य बन जाना चाहिए।
ऑस्ट्रेलियाई गणराज्य पर बहस
यह घटना ऑस्ट्रेलिया में बढ़ती उस आवाज को और तेज कर सकती है जो देश को एक स्वतंत्र गणराज्य बनाने की मांग करती है। कई राजनेताओं और समाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया को ब्रिटिश शाही परिवार से अलग होकर एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करनी चाहिए।
