इजराइल ने 54 दिन बाद वॉकीटॉकी हमले की जिम्मेदारी ली: नेतन्याहू ने सुरक्षा के नाम पर कार्रवाई की मंजूरी दी थी, लेबनान में 40 मौतों की पुष्टि
54 दिन बाद, इजराइल ने आखिरकार लेबनान में हुए विवादास्पद पेजर-वॉकीटॉकी हमले की जिम्मेदारी ली है। इस हमले में कम से कम 40 लोगों की मौत हुई थी, और इस घटना के बाद से क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कदम देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया था। इस घटनाक्रम के बाद से इजराइल और लेबनान के बीच तनाव और बढ़ने की संभावना है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है।
हमले का उद्देश्य और नेतन्याहू का बयान
इजराइल ने स्पष्ट किया कि यह हमला सुरक्षा कारणों से किया गया था। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने बयान में कहा कि यह निर्णय सुरक्षा एजेंसियों की सलाह पर लिया गया, ताकि देश को होने वाले संभावित खतरों को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि हमले से पहले कई खुफिया सूचनाएं प्राप्त हुई थीं, जो इस बात की ओर इशारा कर रही थीं कि लेबनान से इजराइल पर हमला करने की तैयारी की जा रही है। इसके मद्देनजर, नेतन्याहू ने सुरक्षा की दृष्टि से इस हमले की मंजूरी दी थी।
लेबनान में 40 मौतें और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इस हमले में लेबनान में कम से कम 40 लोगों की मौत हुई थी, जिसमें से अधिकतर आम नागरिक बताए जा रहे हैं। इसके कारण लेबनान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस हमले की निंदा करने की अपील की। संयुक्त राष्ट्र और कई मानवाधिकार संगठनों ने इस हमले पर चिंता जताई है। इन संगठनों ने इजराइल के इस कदम को अनुचित ठहराते हुए इसे क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बताया है।
हमले में इस्तेमाल की गई तकनीक और योजना
इस हमले में पेजर और वॉकीटॉकी जैसी संचार तकनीकों का इस्तेमाल किया गया, जिससे इजराइली सेना ने दूरस्थ क्षेत्रों से ही इस मिशन को अंजाम दिया। वॉकीटॉकी सिग्नल के जरिए हमले का सही समय और स्थान निर्धारित किया गया। इस हमले की योजना और तकनीक को लेकर इजराइल ने स्पष्ट किया कि यह तकनीकी उन्नति के तहत सीमित उद्देश्य से ही की गई थी।
क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं
इस घटना के बाद इजराइल और लेबनान के बीच तनाव और बढ़ सकता है। इस हमले से क्षेत्र में पहले से ही अस्थिरता के हालात और गंभीर हो गए हैं। लेबनान के विभिन्न गुट इस हमले के जवाब में इजराइल पर और दबाव डालने की योजना बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले से दोनों देशों के बीच शांति वार्ताओं पर असर पड़ेगा और निकट भविष्य में सीमा पर हिंसा के बढ़ने की आशंका है।
