भारत और चीन के बीच लंबे समय से चल रहे LAC (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) पर तनाव को कम करने के लिए हाल ही में एक समझौता हुआ है। 21 अक्टूबर को दोनों देशों के सैन्य और राजनयिक अधिकारियों की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। इस बीच अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि भारत और चीन के बीच LAC पर तनाव कम करने में उसकी कोई भूमिका नहीं है।
अमेरिका की स्पष्टता
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत और चीन दोनों ही स्वतंत्र राष्ट्र हैं, और वे अपने-अपने विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने में सक्षम हैं। अमेरिका ने इस मामले में किसी भी तरह के हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि यह दोनों देशों के बीच का मुद्दा है और वे अपने स्तर पर इसे हल कर सकते हैं। अमेरिका का यह बयान दोनों एशियाई देशों के बीच संतुलन बनाए रखने की उसकी नीति को दर्शाता है।
भारत-चीन के बीच समझौते की जानकारी
21 अक्टूबर को हुई बातचीत के बाद भारत और चीन ने यह फैसला किया कि वे तनाव कम करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए अपने सैनिकों की तैनाती और गश्ती को सीमित करेंगे। दोनों देशों ने इस समझौते के तहत अपने-अपने सैनिकों को कुछ दूरी पर तैनात करने का निर्णय लिया, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिरता बनी रहे।
क्षेत्रीय स्थिरता पर असर
LAC पर तनाव कम करने के इस समझौते से भारत और चीन के बीच संबंधों में स्थिरता की उम्मीद की जा रही है। हालांकि, दोनों देशों के बीच कई मुद्दे अभी भी चर्चा में हैं, लेकिन यह समझौता एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। अमेरिका के इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि वह इस क्षेत्र में किसी भी प्रत्यक्ष भूमिका से बचना चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से न केवल LAC पर शांति कायम हो सकेगी, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता को भी बढ़ावा मिलेगा।
